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महिला सशक्तिकरण की कहानी — PSEF के साथ बदलती जिंदगियाँ

शहडोल और मध्यप्रदेश में PSEF के महिला सशक्तिकरण कार्यक्रम से जुड़ी सच्ची कहानियाँ — कैसे आम महिलाएँ असाधारण बदलाव ला रही हैं।

✍️PSEF टीम📅9 April 2026⏱️4 min read
#महिला सशक्तिकरण#शहडोल#स्वयं-सहायता समूह#सफलता की कहानी

जब एक महिला बदलती है, पूरा परिवार बदलता है

शहडोल जिले के सुदूर गाँवों में, जहाँ महिलाओं की आवाज़ घर की चारदीवारी से बाहर नहीं जाती थी — PSEF ने वहाँ बदलाव की एक नई लहर लाई है। ये महज़ आँकड़े नहीं हैं — ये जिंदगियाँ हैं जो बदली हैं, सपने हैं जो पूरे हुए हैं।


सुशीला की कहानी — सिलाई से आत्मनिर्भरता

गाँव: रघुनाथपुर, बेओहारी ब्लॉक, शहडोल

सुशीला यादव (32 वर्ष) के पति मजदूरी करते थे। खेती कम, खर्च ज़्यादा। तीन बच्चे थे — स्कूल की फीस, दवाइयाँ, राशन — सब मुश्किल था।

2022 में सुशीला PSEF के सिलाई-कढ़ाई प्रशिक्षण केंद्र में आईं। तीन महीने की मेहनत के बाद उन्होंने एक सिलाई मशीन खरीदी — PSEF की मदद से PM Mudra Yojana से ₹50,000 का लोन लेकर।

आज सुशीला घर पर ही काम करती हैं। उनके पास स्थायी ग्राहक हैं। महीने में ₹7,000–9,000 कमाती हैं।

"पहले हर छोटी चीज़ के लिए पति से माँगना पड़ता था। अब मैं खुद अपने बच्चों की फीस देती हूँ।"


रामकली की कहानी — SHG ने दी नई पहचान

गाँव: बड़े पत्थर, जयसिंहनगर ब्लॉक

रामकली बाई (45 वर्ष) कभी अपने घर से बाहर नहीं निकलती थीं। पढ़ाई नहीं थी, हिम्मत नहीं थी।

2021 में PSEF ने उनके गाँव में "जय माँ दुर्गा SHG" बनाई। रामकली भी जुड़ गईं। धीरे-धीरे उन्होंने बचत करना सीखा, बैंक में खाता खुलवाया, और समूह की बैठकों में बोलना शुरू किया।

आज रामकली उस SHG की अध्यक्ष हैं। समूह ने सामूहिक रूप से ₹2.5 लाख बचाए हैं और एक आटा चक्की खरीदी है जिससे पूरे गाँव को फायदा है। रामकली अब ग्राम पंचायत की बैठकों में भी भाग लेती हैं।

"पहले मैं किसी के सामने बोल नहीं पाती थी। अब सरपंच मुझसे राय माँगते हैं।"


ममता की कहानी — डिजिटल साक्षरता ने बदली दिशा

शहडोल शहर, वार्ड 12

ममता पांडे (28 वर्ष) ने कक्षा 12 पास किया लेकिन नौकरी नहीं मिली। कंप्यूटर चलाना नहीं आता था।

PSEF के डिजिटल साक्षरता कार्यक्रम में उन्होंने 6 हफ्ते में स्मार्टफोन, UPI, और सरकारी पोर्टल चलाना सीखा। फिर PSEF के CSC (Common Service Centre) प्रशिक्षण में कंप्यूटर और Tally सीखा।

अब ममता शहडोल के एक प्राइवेट स्कूल में ऑफिस असिस्टेंट हैं — ₹8,500 महीना। और शाम को वो गाँव की बाकी महिलाओं को मोबाइल चलाना सिखाती हैं।

"PSEF ने सिखाया कि महिला होना कोई कमज़ोरी नहीं — बस मौका चाहिए।"


संगीता की कहानी — जब कानून ने दिया साथ

गाँव: महुआ टोली, बुढ़ार ब्लॉक

संगीता (38 वर्ष) घरेलू हिंसा का शिकार थीं। 15 साल तक सहती रहीं — न जानकारी थी, न हिम्मत थी।

2023 में PSEF की जन चेतना सभा में उन्होंने पहली बार घरेलू हिंसा कानून के बारे में सुना। PSEF की वकील ने उनकी बात सुनी और मुफ्त कानूनी सहायता दी।

आज संगीता के पास अलग बैंक खाता है, Ladli Behna का पैसा आता है, और उनके बच्चे स्कूल जाते हैं। पति अब बेहतर व्यवहार करते हैं — क्योंकि संगीता को अपने अधिकार पता हैं।

"PSEF ने बताया कि सहना मजबूरी नहीं है — अधिकार माँगना हमारा हक है।"


प्रीति की कहानी — बाँस से बनाया व्यवसाय

गाँव: खमरिया, पुष्पराजगढ़

प्रीति आदिवासी परिवार से हैं। जंगल में बाँस बहुत होता है लेकिन उससे पैसे बनाने का तरीका नहीं पता था।

PSEF ने प्रीति और उनके गाँव की 12 महिलाओं को बाँस शिल्प प्रशिक्षण दिया। टोकरियाँ, फर्नीचर, सजावटी सामान बनाना सीखा। PSEF ने शहडोल के बाज़ार और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से जोड़ा।

अब इन 12 महिलाओं का बाँस कला समूह है। हर महिला ₹4,000–6,000 महीना कमाती है। शहडोल हाट और राज्य स्तरीय प्रदर्शनी में उनके उत्पाद बिकते हैं।

"जंगल हमेशा से हमारी ज़िंदगी था। अब जंगल हमारी कमाई भी है।"


PSEF का विश्वास — हर महिला में असीमित क्षमता है

इन कहानियों में एक बात साझा है — मौका मिला तो महिलाएँ पहाड़ हिला देती हैं।

PSEF केवल प्रशिक्षण नहीं देता। हम देते हैं:

  • भरोसा — कि आप कर सकती हैं
  • जानकारी — अपने अधिकारों की
  • नेटवर्क — अन्य महिलाओं का साथ
  • संसाधन — कमाई शुरू करने के लिए

आप कैसे जुड़ सकती हैं?

यदि आप शहडोल या मध्यप्रदेश की किसी भी महिला को PSEF से जोड़ना चाहती हैं:

📞 WhatsApp: +91-8969886176 📍 कार्यालय: नालंदा होटल के पीछे, नया बस स्टैंड, शहडोल 📧 Email: pujafoundation95@gmail.com

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PSEF शहडोल जिले में 5,000+ महिलाओं के साथ काम कर रहा है। हमारे कार्यक्रमों को 80G के तहत दान करें — आपका हर रुपया एक महिला की जिंदगी बदल सकता है।

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