रामकली बाई
रामकली बाई — जंगल बचाओ, जिंदगी बचाओ: बालाघाट की पर्यावरण योद्धा
बालाघाट जिले की रामकली बाई ने PSEF के पर्यावरण कार्यक्रम से प्रेरित होकर अपने गाँव में 800 पेड़ लगाए और वनोपज संग्रह से परिवार की आय ₹3,000 से ₹9,500 प्रति माह की।
जब जंगल घटने लगे
बालाघाट जिले के लांजी ब्लॉक में रामकली बाई (48 वर्ष) का परिवार तीन पीढ़ियों से जंगल पर निर्भर है। महुआ, तेंदुपत्ता, आँवला, हर्रा — यही उनकी आजीविका है।
लेकिन पिछले 10 साल में जंगल सिकुड़ता जा रहा था। वनोपज कम होती जा रही थी। गाँव के पुरुष काम के लिए जबलपुर और नागपुर जाने लगे थे।
"जब जंगल कम हुआ, हमारी रोटी कम हुई। हम समझते ही नहीं थे कि यह क्यों हो रहा है।"
PSEF पर्यावरण जागरूकता शिविर
2022 में PSEF की पर्यावरण टीम ने लांजी में एक वन जागरूकता शिविर आयोजित किया। रामकली और 30 अन्य महिलाएं शामिल हुईं।
शिविर में समझाया गया:
- पेड़ क्यों जरूरी हैं — वनोपज, जल, मिट्टी
- वृक्षारोपण कैसे करें — कौन से पेड़, कहाँ
- वन अधिकार अधिनियम — गाँव वालों के अधिकार
- वनोपज की सही कीमत कैसे पाएं
रामकली की पहल
शिविर के बाद रामकली ने ठान लिया — वे कुछ करेंगी।
वर्ष 1 — वृक्षारोपण
PSEF ने पौधे उपलब्ध कराए (सरकारी नर्सरी के माध्यम से):
- महुआ, आँवला, बाँस, सागौन — 300 पौधे
- गाँव की बंजर जमीन पर लगाए
- रामकली और उनके समूह की 8 महिलाओं ने पानी देकर पाला
वर्ष 2 — विस्तार
- और 500 पौधे रोपे
- PSEF के "हरित ग्राम" अभियान का हिस्सा बनीं
- वन समिति का गठन — रामकली अध्यक्ष
आज — 800 पेड़ जीवित
- लांजी ब्लॉक में रामकली की "हरित टीम" के नाम से जाने जाती हैं
- वन विभाग ने प्रमाण पत्र दिया
आजीविका में बदलाव
| संकेतक | पहले | अब | |--------|------|-----| | मासिक वनोपज आय | ₹3,000 | ₹9,500 | | वनोपज की सही कीमत | नहीं मिलती थी | PSEF market linkage से | | पेड़ लगाए | 0 | 800 | | समूह की सदस्य | 1 | 22 |
रामकली की बात
"पहले हम सिर्फ जंगल से लेते थे। अब हम देते भी हैं। जब हमारे लगाए पेड़ बड़े होंगे, तब हमारे बच्चों के बच्चों को महुआ मिलेगा। यही हमारी असली कमाई है।"
PSEF पर्यावरण कार्यक्रम — बालाघाट
- 15,000+ पेड़ लगाए जिले में
- 40 महिला वन समितियाँ गठित
- वनोपज की उचित मूल्य दिलाने के लिए FPC से जुड़ाव
- जल संरक्षण — 12 तालाबों का पुनरुद्धार
पर्यावरण बचाओ, आजीविका बढ़ाओ:
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